Friday, 1 August 2014

रंगीन सा छाता

इक रंगीन सा छाता हुआ करता था,
जिसे लेके चौथी कक्षा में मैं स्कूल जाया करता था,
बारिश के बेरंग से आसमान में...
कैसे ग़ुरूर से अपने रंग मिलाया करता था,
ना जाने दौड़ते दौड़ते इतने आगे आ गया हूँ,
कि पीछे मुड़के देखता हूँ
तो वो छाता कहीं नज़र नहीं आता,
वक़्त बहुत बीत गया हैं उससे बिछड़े हुए,
मगर अब भी जब यादों के शेहेर में बारिश होती हैं,
बहुत रंगीन होती हैं

इस बार बारिशें आएंगी जब,
तो मैं गुज़ारिश करूंगा,
कि अपने साथ वो छाता ले आये,
यूँ बेरंग सी बारिशें अब सुकूँ नहीं देती

- अल्फ़ाज़ 

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