ये कमरा बड़ा हैं... पिछले वाले से काफ़ी बड़ा
पंखा घुमते हुए थोड़ा आवाज़ करती हैं
जो कमरे की ख़ामोशी में गूंजती हैं
तुम जब भी सपनों में आओ
दबे पाओं आना.... वरना तुम्हारी आहटों से मैं नींद से जाग जाऊंगा
आज बारिश हुई थी शाम को
खिड़की का काच थोड़ा टूटा हुआ था
बारिश की छीटें अंदर आ गयी
मेज़ पे कुछ कागज़ें रक्खा था मैंने … वो भीग गयी
जो सियाही थी कागज़ पर वो फ़ैल गयी
और अल्फ़ाज़ कुछ धुंधले से हो गए
तीन साल परिवार से दूर रहकर
कुछ रिश्तों की सियाही फ़ैल सी गयी हैं
ज़िन्दगी के कागज़ पर
हैंड बैग में कपड़ों को भरा हैं
जिसमे से दो टी-शर्ट तुमने दिया था मुझे
मैंने उन दो टी-शर्ट को
तुम्हारी कुछ यादों के साथ समेट लिया उस बैग में
बहार कॉरीडोर पे तीन कुत्ते टहल रहे थे
आँखों से भूखे मालूम पड़े
मैंने हैंड बैग के अंदर तलाशा तो तुम्हारे यादों के बीच
मुझको एक बिस्कुट का पैकेट मिला
मैंने वो बिस्कुट कुत्तों को खिला दिया
उनकी आँखों में दोस्ती के जज़्बात नज़र आये
अब इस मोहोल्ले में मैं अजनबी नहीं रहा
एक और मोहल्ला अब धीरे धीरे जानने लगा हैं मुझको
एक और कमरा मैंने बदल लिया … एक "घर" की तलाश में
-अल्फ़ाज़
पंखा घुमते हुए थोड़ा आवाज़ करती हैं
जो कमरे की ख़ामोशी में गूंजती हैं
तुम जब भी सपनों में आओ
दबे पाओं आना.... वरना तुम्हारी आहटों से मैं नींद से जाग जाऊंगा
आज बारिश हुई थी शाम को
खिड़की का काच थोड़ा टूटा हुआ था
बारिश की छीटें अंदर आ गयी
मेज़ पे कुछ कागज़ें रक्खा था मैंने … वो भीग गयी
जो सियाही थी कागज़ पर वो फ़ैल गयी
और अल्फ़ाज़ कुछ धुंधले से हो गए
तीन साल परिवार से दूर रहकर
कुछ रिश्तों की सियाही फ़ैल सी गयी हैं
ज़िन्दगी के कागज़ पर
हैंड बैग में कपड़ों को भरा हैं
जिसमे से दो टी-शर्ट तुमने दिया था मुझे
मैंने उन दो टी-शर्ट को
तुम्हारी कुछ यादों के साथ समेट लिया उस बैग में
बहार कॉरीडोर पे तीन कुत्ते टहल रहे थे
आँखों से भूखे मालूम पड़े
मैंने हैंड बैग के अंदर तलाशा तो तुम्हारे यादों के बीच
मुझको एक बिस्कुट का पैकेट मिला
मैंने वो बिस्कुट कुत्तों को खिला दिया
उनकी आँखों में दोस्ती के जज़्बात नज़र आये
अब इस मोहोल्ले में मैं अजनबी नहीं रहा
एक और मोहल्ला अब धीरे धीरे जानने लगा हैं मुझको
एक और कमरा मैंने बदल लिया … एक "घर" की तलाश में
-अल्फ़ाज़