उस बड़े से मॉल का नाम क्या हैं?
वही जो उस लम्बी सी सड़क के
दाइने ओर खडा हैं,
खैर जो भी नाम हो,
उस मॉल के पास,
वो फूंकने का अड्डा,
वो पान का "गल्ला",
याद हैं?
जहाँ खड़े खड़े,
गोल्ड फ्लैक लाइट,
और अल्ट्रा माइल्ड,
के धुएँ की आड़ में
छोटी बड़ी बातों पर,
गुफ्तगू करते थे,
याद आई वो जगह?
याद आई वो बातें?
आज उसी मॉल के बगल से,
गुज़र रहा था,
तो दो मिनट के लिए,
रुक गया उस अड्डे पर,
वही पुरानी सिगरेट,
अल्ट्रा माइल्ड माँगी,
वही पुराने लाइटर से,
उस सिगरेट को जलाया मैंने,
और पीछे मुड़ा
तो खुद से रूबरू हुआ,
उस छोटे से बेंच पर बैठा था,
तुम दोनों के साथ,
कोई बात चल रही थी,
ठीक से सुन नहीं पाया,
खैर वो बात जो भी रही हो,
ख़ुशी इस बात की थी,
कि खुदसे मुलाक़ात हुई थी,
यूँ रोज़ रोज़ थोड़ी ना,
यादें आ जाती हैं बाहे पसार,
किसीसे मिलने?
- हाथ वाला ठाकुर और छह छह गोली वाले बाबा के साथ, पहले ट्वीट-अप को याद करता कोई अल्फ़ाज़
No comments:
Post a Comment